रायगढ़। चक्रधर समारोह की चौथी शाम अकॉर्डियन की सुरीली धुनों से ये शाम सजी। रायपुर से पहुंचे तपसीर मोहम्मद और उनकी टीम ने कई प्रसिद्ध गीतों की इंस्ट्रुमेंटल प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की खासियत रही की इसमें 8 वर्ष की नन्ही कलाकार से लेकर 77 साल के लीजेंड कलाकार तपसीर मोहम्मद ने साथ मिलकर ऐसा कार्यक्रम पेश किया कि श्रोताओं की वाहवाही उन्हें पूरे कार्यगिम के दौरान मिलती रही।
जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां, आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, अजी ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा.. एन इवनिंग इन पेरिस, गुलाबी आंखे जो तेरी देखीं जैसे गीतों पर शानदार प्रस्तुति दी।
अफ्रीकी कलाकार ने कहा छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा
चक्रधर समारोह के मंच पर आज एक अनोखा नजारा दिखा। जब एकॉर्डियन वादन की एंकरिंग करने मंच पे अफ्रीकी कलाकार पहुंचे। जिसे देखकर दर्शक भी कौतूहल से भर उठे। साउथ अफ्रीका से पहुंचे जी रेक्स और क्रोनी हॉनिड दर्शकों को कार्यक्रम का ब्यौरा देते रहे। जिसका सुनने वालों ने खूब लुत्फ उठाया। अपने बीच विदेशी कलाकारों को पाकर श्रोताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
गणेश वंदन से अनिता शर्मा ने बटोरी वाह-वाही
चक्रधर समारोह-2024 के चौथी संगीत संध्या में रायगढ़ की अनिता शर्मा ने भगवान श्री गणेश वंदन घर में पधारो गजानन जी सामूहिक भक्ति गीत गायन व जयकारे के साथ भक्तिमय माहौल में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उनके सुमधुर प्रस्तुति नगरी हो अयोध्या की … रघुकुल का घराना हो गीत से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मौके पर उन्होंने एक से बढक़र एक भक्ति गीत की प्रस्तुति दे रही है।
शास्त्रीय संगीत भावों और रागों का खूबसूरत संगम
दिल्ली के श्री शिव प्रसाद राव शास्त्रीय गायन पर अपनी प्रस्तुति दे रहे है। शास्त्रीय संगीत भावों और रागों का खूबसूरत संगम है। पंडित शिव प्रसाद आकाशवाणी दूरदर्शन सहित विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। शास्त्रीय गायन की शुरुआत वैदिक काल से हुई। शास्त्रीय संगीत की दो पद्धतियां हैं हिंदुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीत। पंडित शिव प्रसाद की शिक्षा दीक्षा कटक में हुई हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में विशेष रुचि के कारण ग्वालियर शास्त्रीय घराने से उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया। हिंदुस्तानी संगीत में ध्वनि के प्रधानता होती है जबकि कर्नाटक संगीत में भाव की प्रधानता होती है।
नीत्या खत्री की कथक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में समा बांध दिया
कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में नीत्या खत्री की कथक प्रस्तुति ने भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं ने पूरे कार्यक्रम में समा बांध दिया। नित्या खत्री रायगढ़ घराने के श्री भूपेन्द्र बरेठ कत्थक नृत्य से शिक्षा प्राप्त कर रही है। कथक शब्द का उदभव कथा शब्द से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ है कथा कहना। यह नृत्य मुख्य रूप से उत्तरी भारत में किया जाता है। कथक नृत्य शैली में विशेष रूप से रायगढ़ घराना, लखनऊ घराना, जयपुर घराना प्रसिद्ध है। कथक नृत्य की प्रस्तुति से पहले उन्होंने कहा कि मैं आज जो भी ही अपने गुरू की वजह से। उन्होंने इस मंच पर प्रस्तुति प्रदान के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित की।
शास्त्रीय संगीत को जिंदगी भर जिंदा रखना है : राकेश चौरसिया
हर स्कूलों में संगीत का क्लास होना चाहिए
रायगढ़। जिले में आयोजित ऐतिहासिक चक्रधर समारोह में शिरकत करने पहुंचे प्रसिद्ध बांसुरी वादक राकेश चौरसिया ने आज दोपहर एक होटल अंश में पत्रकार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आज के दौर में भी शास्त्रीय संगीत को उपर रखने की बात कहते हुए हर स्कूलों में संगीत का क्लास होनें की बात कही।
रायगढ़ जिले के रामलीला मैदान में आयोजित ऐतिहासिक चक्रधर समारोह के चौथे दिन मुंबई के राकेश चौरसिया एवं साथी का बांसुरी एवं तबला वादन होगा। इस कार्यक्रम से पहले शहर के होटल अंश में राकेश चौरसिया ने मीडिया से चर्चा करते हुए प्रसिद्ध बांसुरी वादक राकेश चौरसिया ने कहा कि आज चक्रधर समारोह में मेरा कार्यक्रम है। आप सभी निवेदन है कि आप सभी कार्यक्रम में जरूर आईये और शास्त्रीय संगीत का सपोर्ट करिये और सुनिये शास्त्र क्या कहना चाहता है। यह एक हेरिटेज म्यूजिक है, जिसे हमें जिंदा जिंदगी भर रखना है। हम हमारे आने वाली पीढ़ी और उनके आने वाली पीढिय़ों के लिये। राकेश चौरसिया ने कहा कि फ्यूजन और रिमिक्स के दौर में मै शास्त्रीय संगीत को उपर रखना चाहूंगा। किसी भी किस्म का म्यूजिक अगर हम करना चाहेंगे तो शास्त्रीय संगीत बहुत जरूरी है। शास्त्रीय संगीत हमारी बुनियाद को मजबूत करता है। बुनियाद मजबूत हो जाने से कोई भी संगीत मुश्किल नही है। राकेश चौरसिया ने कहा कि मै सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि हर स्कूलों में संगीत का क्लास होना चाहिए। जरूरी नही की हर आदमी कलाकार बने लेकिन कला को कैसे सुनना है वो आना चाहिए। बच्चों का संगीत से मानसिक संतुलित अच्छा होता है। पहले हमारे स्कूल में संगीत का क्लास होता था सप्ताह में एक दो दिन हम सुनते थे। संगीत से दिमाग की मेमोरी बढ़ती है और दिमाग शांत रहता है।